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अपनी बात – गिरीश मिश्र; राजनीति के कैरम बोर्ड में भागती अवैध बंगलादेशी और रोहिंग्या की किस्मतें

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आज़ाद हिंदुस्तान को सराय समझकर रहने वाले और सराय चलने वाले दोनों परेशान है. जिन्होंने इसे सराय बनाया था वे इस सराय के खर्चे पानी और आक्सीजन सहित देश का धन चूस कर ये मान कर चले थे कि कुछ वर्षों में फिर देश का विभाजन होगा और फिर अगले हिस्से में अपनी सराय खोलेंगे और जो इस सराय में ठहरे थे वे ये मान कर चल रहे थे कि देश तो उनके बाप दादाओं मुगलों का है और वे इसे वापस लेंगे.
कुछ लोग थे इस देश में जो संघ की विचारधारा के चलते देश को मातृभूमि मानते हुए देश के हितों की चिंता करते गए और उन्हें जब प्रधानमंत्री के रूप में मौका मिला तो जनता ने भी भरपूर साथ देते हुए राम राज्य की स्थापना की ओर कदम बढ़ाते उनका साथ दिया।
वैसे योगी के योग को जो समझ पाया वह जानता था कि देश में सफाई उत्तर प्रदेश से ही होगी और इसका प्रभाव पूरे देश पर पड़ेगा। राजनैतिक, धार्मिक चेतना जब बढ़ती है तो देश के नागरिक भी अपने खोये आत्मविश्वास को वापस पाते है.
आज जब राष्ट्र चिंतन और राष्ट्र हित की जुगत में कार्यवाही हो रही तो राज्य से कभी इधर तो कभी उधर मदरसा, मदरसा घूमते कुछ लोग अपनी पहचान छुपाने, बचने और बचाने घूम रहे है और यही समय है जब मदरसों को आगे आकर अवैध नागरिकों की पहचान करके राष्ट्रहित में अपना योगदान देना चाहिए।
देश को खोखला करने की मंशा रखती ये दीमक और इन्हें पालने वालों पर कार्यवाही की आवश्यकता है.सिडनी में जो हुआ कल हिंदुस्तान में भी हो सकता है. दिल्ली का बम ब्लास्ट और देशद्रोही डॉक्टर्स/इंजीनियरों की नई इस तरह की पौध यदि अवैध रोहिंग्या और बांग्लादेशी लाती रही तो फिर देश खतरे में होगा. समय है सचेत रहें.

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