इन्फोसिस के निवेशकों के लिए सोमवार की सुबह निराशा लेकर आई. कंपनी के चौथी तिमाही नतीजे सामने आने के बाद खुले बाजार में इन्फोसिस के शेयर 6 फीसदी तक टूट गए. शुरुआती कारोबार में बीएसई पर इन्फोसिस का बाजार पूंजीकरण गिरकर 6,92,281 करोड़ रुपये पर आ गया. कंपनी के शेयर 10:30 बजे के करीब 6.9 फीसदी टूटकर 1625 रुपये प्रति शेयर पर ट्रेड कर रहे थे. शेयरों में गिरावट की वजह से मिनटों में निवेशकों के 40,000 करोड़ रुपये डूब गए.
देश की दूसरी सबसे बड़ी आईटी कंपनी इंफोसिस का नेट प्रॉफिट मार्च तिमाही में 12% बढ़कर 5686 करोड़ रुपए रहा था. एक साल पहले इसी तिमाही में कंपनी का नेट प्रॉफिट 5,076 करोड़ रुपए था. वित्त वर्ष 2022 की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च 2022) में कंपनी की आमदनी 23% बढ़कर 32,276 करोड़ रुपए रही. यह एक साल पहले इसी तिमाही में 26,311 करोड़ रुपए थी.
इंफोसिस के लिए आगे की राह
कंपनी ने आगे के प्रदर्शन पर गाइडेंस देते हुए कहा है कि वित्त वर्ष 2023 में कंपनी की कॉन्स्टेंट करेंसी रेवेन्यू ग्रोथ 13 से 15 फीसदी रह सकती है. सीएनबीसी-टीवी18 के पोल में कॉन्स्टेंट करेंसी रेवेन्यू ग्रोथ के गाइडेंस के 12-14 फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया था. इसी तरह कंपनी ने आगे कहा है कि वित्त वर्ष 2023 में कंपनी का मार्जिन 21-23 फीसदी रह सकता है. जबकि पोल में इसके 22-24 फीसदी पर रहने का अनुमान लगाया गया था. पूरे वित्त वर्ष 2022 में कंपनी का कॉन्स्टेंट करेंसी रेवेन्यू ग्रोथ 19.7 फीसदी पर रहा है जबकि कंपनी ने अपने गाइडेंस में इसके 19.5-20 फीसदी पर रहने का अनुमान किया था. इसी तरह वित्त वर्ष 2022 में कंपनी की मार्जिन 23 फीसदी पर रही है जबकि कंपनी ने अपने गाइडेंस में इसके 22-24 फीसदी पर रहने का अनुमान किया था.
कितने के ऑर्डर मिले
चौथी तिमाही में कंपनी को 2.3 अरब डॉलर के बड़े ऑर्डर मिले हैं. इंफोसिस के सीईओ सलील पारेख ने इस मौके पर कहा है कि कंपनी ने व्यापक आधार वाले प्रदर्शन के साथ मार्केट हिस्सेदारी में बढ़ोतरी जारी रखने में कामयाबी पाई है और 1 दशक की सर्वोच्च वार्षिक वृद्धि हासिल की है.






