देश का दुर्भाग्य रहा है कि अपने निज स्वार्थ के चलते कुछ नेताओं ने देश की अस्मिता के साथ खिलवाड़ किया है. कल प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ओजस्वी उदगार संसद के पटल पर सुने, देश से कितना बड़ा सच छुपाया गया ! वन्देमातरम सिर्फ भारतीय संस्कृति लिए हुए था इसलिए मुस्लिम लीग की आपत्ति के कारण नेहरू जी ने हटा दिया उस गीत के उस हिस्से को जिसमे भारतीयता बस्ती थी ? जैसा की होता आया है, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भुला दिए गए और सिर्फ एक खानदान को अंग्रेजों ने स्थापित किया और कालांतर में वही खानदान नकली गाँधी बनकर संसद में गरिया रहा है, दुर्भाग्य तो ये भी है कि वन्देमातरम की चर्चा में इसी नकली गाँधी परिवार के युवराज गायब है. ये विरोध पक्ष के नेता भी है और गायब है,
बंकिम बाबू के पोते ने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा की मेरे दादाजी को भुला दिया गया और वन्देमातरम की आत्मा से छेड़छाड़ की गई. आज राज्यसभा में इस पर चर्चा होगी। एक और बात है जिसे गंभीरता से सोचना होगा, चर्चा वन्देमातरम् की हो रही लेकिन कांग्रेस के गोगोई, प्रियंका और बाकी विरोधी दलों के नेता इस चर्चा को गुमराह करते सरकार और मोदी जी पर व्यक्तिगत हमले करते नजर आ रहे है जो शर्मनाक है.
मेरे स्व पिता की किताब मैं और मेरी पत्रकारिता के पेज नंबर १८ के कुछ अंश ऐसे है ” प्रातःकाल वन्देमातरम से भेंट का अचार विचार होता था स्वतंत्रता संग्राम के दिनों में, नारों से उद्वेलित होकर अंग्रेज गोली तक चलते रहे, न गोली से डरे न ही अंग्रेजों की क्रूरता से. आजादी के बाद कुछ स्वार्थान्ध कांग्रेसी उपजे जिन्हे जगाने भगत सिंह ने असेम्ब्ली बेम काण्ड के बाद कहा था इनको जगाना जरुरी था.
कांग्रेस का मूल चरित्र उजागर न हो इसलिए इसे अपनी पसंद के इतिहासकारों से ढंकवाने की असफल कोशिश की गई लेकिन सूरज और सत्य को आप ज्यादा दिन छुपा नहीं सकते। सुप्रभात सहित वन्देमातरम्






