मोदी सरकार के समक्ष जब जब कड़े फैसले लेने के और सामने आकर कड़क सन्देश देने के अवसर आये है, सरकार ने दही जमाकर लस्सी का ही इंतज़ार किया है और इसी कारण अच्छा मंतव्य होने के बाद भी वे कटघरे में खड़े रहते है. बिल्ली को ऊन का गोला दे दो, पहले वह खेलती है उसके बाद स्वयं उसी में फंस जाती है की रणनीति बीजेपी के कार्य का हिस्सा बन चुकी है.
बंगलादेश की घटनाये आज की घटनाएं नहीं वरन वो नासूर है जो दशकों से हम अच्छे सम्बन्धो की आस में झेलते आये है, कोई विद्यार्थी जब कालेज या स्कूल के लिए, उसकी अस्मिता के लिए खतरा बन जाए तब उसे दंड दिया जाता है या निकाला जाता है. चलिए माना वह विद्यार्थी आपकी स्कूल का है लेकिन विदेशी प्रशासन के आधीन है तब आप उस फ़्रेंचाइज़ पर नकेल लगाते है, बहरहाल आपके इस विद्यार्थी के हिन्दुस्तानी फ़्रेंचाइज़ जब आपको आँखे दिखाए, उस विद्यार्थी अपने विद्यालय में न घुसने देने के प्रबंध भी न करे और आपको भी ऐसा करने से रोके और उसके इस कदम से उस विद्यार्थी का अनुसरण करते हुए बहुत से वैसे ही अनुयाई पूरे देश में फ़ैल कर सड़ांध फैलाये तब इस फ्रेंचाइज़ी पर कार्यवाही जरुरी होती है.
मोदी सरकार लगातार बंगाल में नजर गड़ाए हुए है और कार्य कर रही ताकि बंगलादेश के अवैध घुसपैठिये अंदर न आ सकें लेकिन जब यह सुनाई देता है कि पश्चिम बंगाल सरकार जमीन नहीं दे रही ! तब कब तक आप चुप्पी साध सकते है ये जानते हुए कि अवैध बंगलादेशियो को घुसाने और बसाने का कार्य तृणमूल कांग्रेस के अंतर्गत ही हुआ है ! सिर्फ बयानों से काम नहीं चलता साहब, जनता जानना और देखना चाहती है आप क्या कार्यवाही कर रहे ? जब जम्मू कश्मीर पर कार्यवाही हो रही तो उससे दोगुनी कार्यवाही देश के हर उस राज्य में होनी चाहिए जहाँ जम्मू कश्मीर जैसे हालत नहीं है.
हाल की ed रेड के दौरान ममता बेनर्जी ने मुख्यमंत्री होने के नाते देश की एजेंसियों के कार्य में बाधा डाली है और दस्तावेज ले गई सबके सामने। उन्हें सबूत नष्ट करने और समय दिया जाना भी सवालिया निशान लगाते है, कैसे इतना पंगु हो सकते है हम ? मोदी सरकार को कड़ी कार्यवाही करते हुए ममता सरकार को बर्खास्त करवा देना चाहिए पर्याप्त सबूत है और भले ही सरकार न बना पाए, ४ महीने में कम से कम जो सरकार अभी जमीन नहीं दे रही सीमाओं की सुरक्षा के लिए, वो लेकर काम पूरा कर देना चाहिए। कभी कभी सरकार ध्यान में नहीं रहना चाहिए।
मोदी सरकार को बिल्ली का छींका टूटने जैसी स्थिति का इंतज़ार नहीं करना चाहिए।






