पहले तो चोरी करो, फिर जमानत पे रहो और फिर जब सार्वजानिक रूप से क़ानूनी मार पड़े तो सरपंच को दोष दो ! ये हैं कोंग्रेसियों का असली चरित्र। घोटालों से ओत प्रोत इनकी सत्ता जनता ने उखाड़ फेंकी थी, इनके कारनामे सार्वजनिक है, हिन्दुओं के प्रति इनकी नफरत भी सार्वजानिक है और हिन्दुओं की आस्थाओं के प्रतीकों को मिटाने के भी साक्ष्य है इनके प्रति।
कल संसद में राहुल गाँधी ने एक पुस्तक का जिक्र किया जो सेवानिवृत जनरल मुकुन्द नरावणे की तथाकथित अप्रकाशित पुस्तक का हिस्सा है, संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा थी लेकिन ये मंद बुद्धि दिखाते हुए संसद की कार्यवाही को बाधित करते रहे. नरवणे की पुस्तक है, नहीं लिखा नहीं, ये अलग विषय है, देश की सुरक्षा और सेना के सम्बन्ध पर बात करते समय हर किसी को ये ध्यान रखना चाहिए कि दुश्मन को इस बात से कोई फायदा हो सकता है क्या ?
कल न्यूज़ चैनल्स के डिबेट में दो सेवानिवृत जनरलों को आपस में लड़ते देखा, जनरल दयाल को लगाम देना चाहिए अपनी महत्वकांक्षा को, और सेना से सम्बंधित बातों को सार्वजानिक नहीं करना चाहिए।
ख़बरों के अनुसार हमारी सेना ने उस हिस्से पर दखल दिया था जो चीन के गेर्रिसन के कब्जे में था. बहरहाल राहुल गांधी के इस आचरण पर कड़ी कार्यवाही होनी चाहिए। अपने देश की सुरक्षा से खिलवाड़ है ये और देश में अशांति फैलाने के भी.






