देश में कीड़ों पर जब से नमक छिड़का जा रहा है वे बिलबिला रहे है. ये नमक राष्ट्रवादी है जो इन कीड़े मकोड़ों से बर्दाश्त नहीं हो रहा. खाजदीप, विलेन अन्धकारराज, छुणाल कामरा, सहित कोहराम ममदानी, खानसामा शेरवानी, रैबीज कुमार, सहित सभी इस नरेटिव को फैलाने में लगे है कि मुसलमान है इसीलिए जमानत नहीं मिली। और तो और उद्धव ठाकरे के सुपुत्र आदित्य ठाकरे ने इसे मिसकैरेज ऑफ़ जस्टिस तक कह डाला।
शिवसेना उद्धव ठाकरे का कार्यकर्ता अपने घर के सदस्यों से ही आँख नहीं मिला पा रहा इन बाप बेटे के कारण ! बहरहाल शरजील और ओमर खालिद को प्रकाशराज ने भविष्य का नेता कहते हुए मोदी जी पर सीधा हमला किया.
उधर अमेरिका सीधे सीधे धमकियाँ दे रहा है, बांग्लादेश, नेपाल, वेनेजुएला में उसी देश के नमकहरामों का सहारा लेकर तख्ता पलट करने के बाद अमेरिका सोचता है भारत में भी यह कर देगा ! किसान आंदोलन और बाकि आंदोलन में कोशिश की लेकिन जिस पर ये भरोसा कर रहे है वो एक नंबर का मंद बुद्धि निष्णात बालक है जो इनका सब कुछ किया धरा गुड़ गोबर कर देता है और तो और देश की जनता भी उसे अब विदूषक के रूप में लेने लगी है.
इस देश का सौभाग्य ये भी है कि दधीच जैसे संत भी यहाँ पैदा हुए और संजय जैसे त्रिकाल दृष्टा भी, राष्ट्र में कुछ यू ट्यूब चैनल्स हैं जो बिना बीजेपी के संरक्षण में राष्ट्रवादी एजेंडे पर लगे हुए है, स्वयं के घर में होम कर रहे है और धनाभाव की ऊष्मा भी झेल रहे है लेकिन उनमे राष्ट्र के इस स्वतंत्रता संग्राम की जिम्मेदारी को समझते हुए वे लगे हुए है और शायद इसी का परिणाम है कि ममदानी के कुत्सित प्रयास को जोरशोर से उन कानों तक आवाज पहुंचाई गई जो कभी सिर्फ कपिल सिब्बल और मनु सिंघवी के फैलाये झूठ में लुप्त हो जाती थी. श्री ओंकार चौधरी, श्री संजय दीक्षित, वीरेंदर नाथ भट्ट जी,श्री अभिषेक तिवारी, बाबा रामदास जी, पुंढीर जी, भाऊ तोरसेकर जी, आदि अचिंत जी, अंजू जी, सरदाना जी और अजीत भारती जी सहित अनेक लोग है जिनका नाम लिखते लिखते शाम हो जाएगी, लेकिन ये स्पष्ट है कि हिन्दुस्तान ऐसे सुपुत्रों से धनी है जो कोई भी ट्रम्प या अपने देश के अंदर उसकी अस्मिता पर हंप करने वालों पर बहुत भारी है. ये वो लोग है जो बिना किसी स्वार्थ के देश के लिए अपने पूरे सामर्थ्य से लगे हुए है. इन्हीं में एक नाम अर्नब गोस्वामी का भी है, और अर्नब ने हाल में ही चूलें हिलाई भाजप के सोशल मीडिया या मीडिया इंचार्ज की लेकिन सब अपनी मर्यादा में ये नहीं कर पाते।
बीजेपी का सोशल मिडिया विभाग सिर्फ कांग्रेसी और वामपंथी पत्रकारों, लेखकों को साधने में लगा है, कुछ गिने चुने जो संघ के माध्यम से किसी पोस्ट पर पहुंचे वे पहुँच कर पता नहीं किस कारण अपने उद्देश्य से भटक जाते है और जो ऊपर नाम लिखे है में से एक की भी सहायता नहीं ली जाती और शायद इस परिवर्तन की आवश्यकता है बीजेपी में.
इस देश में कोई भी बन्दर कितनी भी उछल कूद कर ले, उसे पकड़ना हम जानते है. सुप्रीम कोर्ट ने जमानत न देकर अनेक राष्ट्रवादियों को मन की शान्ति दी है और ये ही होना चाहिए था. अब यदि देश विरोधियों के साथ भी कड़ाई हो तो देश जरूर सुरक्षित रहेगा। कड़ा निर्णय लेना पड़ेगा और यदि समझ में आ रहा हो कोई यूनुस बनने की या बनाने की कोशिश हिन्दुस्तान में करे तो उसको उठाया जाए. राहुल गाँधी की यात्राओं और किये जाने वाले करारों का सार्वजानिक होना आवश्यक है. जो भी भारतीय अपनी अपनी छमता से राष्ट्रवादी यू ट्यूबर्स के इस अश्वमेघ यज्ञ में सहायता कर रहे है वे इनकी नहीं अपनी सहायता कर रहे है क्योकि तप का प्रतिफल इस देश की जनता को ही मिलेगा और आप उसका जरिया बन रहे है.
जारी रखें निर्बाध ये यज्ञ क्योकि अगले ५ वर्ष बहुत महत्वपूर्ण है हमारे आने वाले कल और धर्म के अस्तित्व के लिए. वन्दे मातरम्






