हिंदुस्तान के नेताओं, सामाजिक और राष्ट्रवादी कार्यकर्ताओं/चिंतकों का एक वर्ग बंगलादेश को लेकर न सिर्फ सशंकित है वरन इसके पीछे छुपी हुई ताकतों को भी देखकर चिंतित भी है. एक ओर बंगलादेश हिंदुस्तान के खिलाफ लगातार जहर उगल रहा है और हमारे घर के अंदर के एक पूर्व मुख्यमंत्री रहे दिग्विजय सिंह जैसे लोग यदि यह कहते पाए जाते है कि बंगलादेश में जो हो रहा सही हो रहा तब ये सवाल उठता है कि आखिर कब तक इनकी ये घटिया मानसिकता स्वीकार की जाएगी ? कसाब यदि पकड़ा नहीं जाता तो सुशिल शिंदे और दिग्विजय सफल होते हिन्दू टेरर की परिकल्पना में.
भारत में एक बिटिया का पित्तवृत नकाब हटाया गया तो पूरी दुनिया में माहौल बनाने की कोशिश हुई और बंगलादेश में एक हिन्दू को जिन्दा जला दिया गया आह तक नहीं निकली इनकी, आरफा खानम, जुबैर, राहुल, दिग्विजय और बहुत से है जिनका नाम लिखते लिखते सप्ताह निकल जायेगा !!
पश्चिम मीडिया में भी इस पर कोई ख़ास चर्चा नहीं हुई बल्कि हादी जैसे व्यक्ति के लिए सब के सब झंडे झुकाकर बंगलादेश के समर्थन में खड़े हो गए. बंगलादेश मूर्खता की चरम सीमा पर तो है ही पाकिस्तान भी इस परिस्तिथि की फायदा उठा रहा है. भारत की बढ़ती आर्थिक स्थिति इनको हजम नहीं हो रही इसलिए किसी न किसी बहाने भारत को उकसाकर युद्ध में धकेलना चाहते है. ये सबकी समझ में आ रहा लेकिन हम क्या कर रहे है ?
इस बात का जवाब हम कुछ ऐसे दे सकते है. पहला देश के अंदर जितने बंगलादेशी है उनको और उनके समर्थकों पर ऐसी कार्यवाही हो की आने वाले वर्षों में ये मिसाल बने, सिर्फ धरना प्रदर्शन से काम नहीं चलेगा। दूसरा बंगलादेश को जाने वाली हर सहायता बंद करें और ये तुरंत करें। कोई इसकी उम्मीद न करे कि मदद से कुछ हासिल होगा, आपने मालद्वीव, तुर्की, अजरबैजान सबकी मदद की लेकिन हसिल क्या हुआ ? तुर्की ड्रोन ?? आखिर किस बात का इंतज़ार ? अब समय है हम भी कुछ तूफानी करें सिर्फ कोई शीतल पेय पर चर्चा न करें.
बंगलादेश के हिंदू २८ प्रतिशत से ८ प्रतिशत पर आ गए और आज कल में नहीं आये, हम ही इसे देखते रहे और कारवां गुजर गया. वो तो आभार मानिये भगवान् का की २०१४ में सत्ता परिवर्तन हुआ और अब कुछ बंगलादेशियो और रोहिंग्यों पर कार्यवाही हो रही है. कोलकाता में यदि ममता सीमा पर जमीन नहीं दे रही बाड लगाने तो केंद्र को उसे बर्खास्त करके या देश की सुरक्षा से सम्बंधित कानून का स्तेमॉल करके सब अपने हाथ में लेकर कार्य पूरा करना होगा। जो करना है करिये, फ़रवरी का इंतज़ार न करें, ८०००० हिन्दुओ ने २०१४ के पहले भारत में नागरिकता मांगी थी और अब तक सिर्फ १२००० को दी गई है, ये बाबू तंत्र जो बाधा बनता है इस कार्य में को भी जेल में डाला जाये तब जाकर देश में सुधार आएगा। गनीमत है योगी जी ने पूर्वांचल से लेकर पश्चिमी उत्तरप्रदेश पर ध्यान देखर एक षड्यंत्र के तहत जगह जगह बनने वाले अवैध मदरसे ध्वस्त किये।
नेपाल सीमा पर भी सुरक्षा कर्मी इस बार देश प्रेम का उदाहरण बने और हर उस व्यक्ति को गोली मारें जो का अहित करने अवैध तरीके से देश में घुस रहा हो. वन्दे मातरम्






