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NPS खाताधारक की अचानक मौत के बाद किसे मिलता है पैसा, इसे लेने के लिए क्या करना जरूरी, जानें सबकुछ

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पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) द्वारा संचालित नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) एक स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति प्लान है. इसमें खाताधारक को बाजार आधारित रिटर्न मिलता है और रिटायरमेंट के बाद के जीवन के लिए फंड तैयार होता रहता है. इसके तहत रिटायरमेंट बेनेफिट्स के अलावा खाताधारक की अचानक मौत होने पर नॉमिनी को डेथ बेनेफिट्स दिए जाते हैं. इसमें एनपीएस ग्राहक की मृत्यु के बाद 100% एनपीएस कॉर्पस का भुगतान नॉमिनी या फिर कानूनी उत्तराधिकारियों को किया जाता है.

एनपीएस ग्राहक के नॉमिनी या उत्तराधिकारी पेंशन प्राप्त करने के लिए एन्युटी भी खरीद सकते हैं. गौरतलब है कि अगर एनपीएस खाताधारक जीवित है तो उसके लिए एन्युटी लेना अनिवार्य होता है. अगर सब्सक्राइबर ने eNPS पोर्टल के जरिए रजिस्टर किया था तो उनकी मृत्यु के बाद विड्रॉल फॉर्म एनपीएस ट्रस्ट के पास जमा किया जाएगा. एक बार एनपीएस ट्रस्ट द्वारा दस्तावेजों को सत्यापित और अप्रूव करने के बाद आगे की कार्यवाही होगी.

किन दस्तावेजों की जरूरत?
नॉमिनी या उत्तराधिकारी को मृत्यु प्रमाण पत्र, कानूनी उत्तराधिकारी प्रमाणपत्र/उत्तराधिकार प्रमाणपत्र, केवाईसी दस्तावेज व बैंक खाता प्रमाण (नॉमिनी और कानूनी उत्तराधिकारी का) जमा करना होता है. ये सभी दस्तावेज डेथ विड्रॉल फॉर्म के साथ लगाए जाते हैं. इसी फॉर्म में जरूरी कागजातों की जानकारी भी होती है. ये फॉर्म प्रोटियन सीआरए की वेबसाइट www.npscra.nsdl.co.in से आसानी से डाउनलोड किया जा सकता है।

कहां करें जमा
नॉमिनी या उत्तराधिकारी (जो भी फंड क्लेम कर रहा है) को पॉइंट ऑफ प्रेजेंस (POP) के पास दस्तावेज जमा करने होते हैं. दस्तावेज मिलने के बाद POP फॉर्म और सहायक दस्तावेजों को सत्यापन करेगा. इसके बाद निकासी की अर्जी को प्रोटियन सीआरए पर आगे बढ़ा देगा. इसके बाद लंप-सम अमाउंट दावेदार के खाते में भेज दिया जाएगा. अगर उन्होंने एन्युटी का चयन किया है तो इसकी जानकारी उनके द्वारा चुने गए एन्युटी सर्विस प्रोवाइडर के साथ शेयर की जाएगी.

नॉमिनी नहीं होने पर क्या?
अगर खाताधारक ने कोई नॉमिनी नहीं बनाया था, या फिर पीएफआरडीए के दिशानिर्देशों के अनुसार मौजूदा नॉमिनी वैध नहीं है तो पैसा कानूनी उत्तराधिकारी या परिवार के सदस्य को मिलेगा. हालांकि, इसके लिए उत्तराधिकारी को भी इससे मामले से संबंधित अधिकारी या उस इलाके की कोर्ट से उत्तराधिकार प्रमाण पत्र लाना होगा.

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