वस्तु एवं सेवा कर (GST) काउंसिल की मीटिंग 8 अक्टूबरर को होने जा रही है. पहले यह बैठक 7 अक्टूबर को निर्धारित थी, लेकिन आज सरकार ने बताया कि अब यह मीटिंग 8 अक्टूबर को होगी. इस बैठक में जीएसटी दरों में किसी तरह के बदलाव का प्रस्ताव नहीं है. लेकिन, जीएसटी व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी, सरल और कारोबार-अनुकूल बनाने की दिशा में कई बड़े कदमों का ऐलान हो सकता है. इस बैठक बैठक में प्रक्रियागत सुधारों को मुख्य एजेंडा बनाया गया है. मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस बार काउंसिल की मेज पर तीन ऐसे बड़े प्रस्ताव हैं, जो पास हुए तो कारोबारियों को इंस्पेक्टर राज और टैक्स के उलझे नियमों से बड़ी मुक्ति मिल सकती है.
इस बैठक से पहले आज वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लिंक्डइन पर एक पोस्ट कर बताया कि मीटिंग में क्या हो सकता है. वित्त मंत्री ने अपनी पोस्ट में लिखा कि परिषद की इस उच्चस्तरीय बैठक में रजिस्ट्रेशन, रिटर्न, रिफंड, कानूनी विवादों के निपटारे और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के निर्बाध प्रवाह से जुड़े अहम प्रस्तावों पर विचार होगा. सीतारमण ने लिखा, “टैक्सपेयर्स का अनुभव हमारी नीतियों के क्रियान्वयन का मार्गदर्शन करता रहना चाहिए. GST
सितंबर 2025 में जीएसटी काउंसिल ने जीएसटी सिस्टम में बड़ा बदलाव किया था. आम आदमी को बड़ी राहत देते हुए टैक्स की दर को घटाया गया. जीएसटी काउंसिल ने चार स्लैब को बदलकर तीन स्लैब कर दिए. अनुपालन से जुड़ी दिक्कतें करने और वर्गीकरण को लेकर होने वाले विवादों को दूर करने के लिए वस्तुओं और सेवाओं की विभिन्न श्रेणियों को तर्कसंगत बनाया गया था. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपनी लिंक्डइनन पोस्ट में बताया कि अक्टूबर 2025 से जुलाई 2026 के बीच रिपोर्ट की गई टैक्सेबल सप्लाई यानी ऐसी वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति जिन पर टैक्स लगता है, का मूल्य एक साल पहले की समान अवधि की तुलना में 25.8 फीसदी बढ़ा है.
अधिकारियों से छिन सकती है अरेस्ट पावर
मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि जीएसटी काउंसिल के एजेंडे में सबसे ऊपर टैक्स अपराधों का डिक्रिमिनलाइजेशन (Decriminalisation) है. वर्तमान में CGST Act के Section 69 के तहत कमिश्नर को गंभीर अपराधों जैसे फर्जी बिल, इनपुट टैक्स क्रेडिट में धोखाधड़ी या टैक्स चोरी के संदेह में किसी भी कारोबारी को सीधे गिरफ्तार करने का अधिकार है. सूत्रों के मुताबिक, GST काउंसिल की लॉ कमेटी ने इन विशेष अरेस्ट प्राविजन्स को समाप्त करने की सिफारिश की है. अगर ऐसा होता है तो जांच के नाम पर होने वाले उत्पीड़न और गिरफ्तारी का खौफ खत्म होगा.
ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) को 18% टैक्स से राहत
भारत के तेजी से बढ़ते ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) और टेक/इंजीनियरिंग सर्विस एक्सपोर्टर्स के लिए यह बैठक बड़ा तोहफा ला सकती है. बहुराष्ट्रीय कंपनियों की भारत स्थित इकाइयां विदेशी कंपनियों के लिए प्रोडक्ट डेवलपमेंट, टेस्टिंग और इंजीनियरिंग का काम करती हैं और भुगतान विदेशी मुद्रा में लेती हैं. लेकिन मौजूदा ‘प्लेस ऑफ सप्लाई’ नियमों के कारण यदि काम भारत में भेजे गए किसी कंपोनेंट पर हुआ है, तो इसे घरेलू सेवा मानकर 18% GST थोप दिया जाता है.
यदि कोई विदेशी ग्रुप कंपनी किसी वस्तु को भारत स्थित अपने सेंटर में भेजती है और वह सेंटर उस वस्तु पर काम करता है, तो मौजूदा कानून के तहत सेवा को भारत में प्रदान की गई माना जाता है, न कि विदेश में. इस वजह से यह सेवा एक्सपोर्ट कैटेगरी से बाहर हो जाती है, भले ही ग्राहक विदेश में हो और भुगतान विदेशी मुद्रा में कर रहा हो. प्रस्तावित संशोधन के तहत ऐसी सेवाओं को एक्सपोर्ट्स के रूप में मान्यता देने की अनुमति दी जा सकती है. इसका मतलब होगा कि इन सेवाओं पर जीएसटी नहीं लगेगा और इनपुट्स पर चुकाए गए टैक्स का रिफंड भी लिया जा सकेगा.
रिफंड का नया ऑटोमैटिक सिस्टम
काउंसिल टैक्सपेयर्स की सबसे बड़ी सिरदर्दी अटके हुए रिफंड को पूरी तरह डिजिटल और ऑटोमैटिक बना सकती है. सितंबर 2025 में पात्र रिफंड का 90% हिस्सा 7 दिनों के भीतर जारी करने का नियम तो बना था, लेकिन यह फैसला टैक्स अधिकारी के विवेक पर निर्भर था कि कारोबारी ‘लो-रिस्क’ श्रेणी में है या नहीं. अब इस मानवीय दखल को खत्म कर ‘रिस्क स्कोर’ आधारित ऑटोमेशन लाया जा सकता है. यह सिस्टम टैक्सपेयर के पिछले रिकॉर्ड और फाइल किए गए रिटर्न्स का डेटा से मिलान करेगा. डेटा मैच होते ही रिफंड बिना किसी बाबू या दफ्तर के चक्कर काटे सीधे 7 दिन में बैंक खाते में ऑटो-रिलीज हो जाएगा. इससे छोटे-बड़े कारोबारियों का वर्किंग कैपिटल नहीं फंसेगा और बाजार में लिक्विडिटी बनी रहेगी.



