यदि आप गौर करें तो देश में आयोजित होने वाले साहित्य उत्सवों का आयोजन अधिकाँशतः अक्टूबर माह से लेकर फ़रवरी माह तक रहते है लेकिन जनवरी जनवरी को आप मान सकते है साहित्य सम्मेलनों की ज्ञान गंगा की बाढ़ !
इनमे से कुछ एजेंडाधारी होते है जो एक विचारधारा के चलते अपना साहित्य एक ओर जनमानस के सामने चर्चा, मीमांसा और शोध के लिए रखते है वही दूसरी ओर युवाओं की विचारधारा, भीड़ की मानसिकता और उसके लिए पर्याप्त ईंधन की आवश्यकता का ध्यान लिए होते है.
कुछ उत्सव विशुध्द रूप से व्यावसायिक होते है जिनमें अक्सर जुगाड़, तू मेरा मैं तेरा या फिर तू मेरी पीठ खुजा मैं तेरी पीठ खुजाऊंगा की मानसिकता लिए होती है. लिखना सबका अधिकार होता है और कुछ नाम के लिए लिखते है कुछ काम के लिए, नाम के लिए लिखने वाले अक्सर घोस्ट लेखकों का स्तेमाल करते है जो बॉलिवुड से लेकर छपी किताबों में पाए जाते है और कुछ स्व विनोद कुमार शुक्ल जैसे होते है जो साधारण से रहते हुए शिकारियों के लिए अनजाने में कन्धा बनते है!
कुछ लेखक नाम की तलाश में इन आयोजनों में घूमते है तो कई इनकी सीढियां धोते धोते साल दर साल मेले के आयोजन में बैठे नजर आते है और थोड़े से नामचीन किसी पुस्तक का अनावरण करते।
झुण्ड की मानसिकता लिए कुछ समूह आपस में जिम्मेदारी बाँट लेते है और एक आपसी समझौते के तहत तुम मुझे नाम दे दो मैं तुम्हारे आयोजन की सफलता का ठेका ले लूंगा वाली जमात का हिस्सा भी होते है.
पुस्तकमेले के सहारे जो लेखक प्रकाशक की मर्जी पर होता है वह अपने अपने हितचिंतकों के बीच अपनी पुस्तक का प्रचार करता है, उसे पुस्तक बिकने की चिंता नहीं होती वरन वह अपने नाम को चिरकाल के लिए अमर कर जाना चाहता है और अच्छा लेखन करने वाले उस मुकाम को हासिल भी कर लेते है, लेकिन एक और विसंगति है कि इनमे से कुछ अच्छा न लिखने वाले साहित्य का पुरस्कार पा लेते है और शायद यही एक कारण है कि पुस्तक मेले और पुरस्कारों पर लोगों का विश्वास कम होता है.
बहरहाल साहित्य के पंख लिए ऊँची उड़ान लेने वाले अच्छी मानसिकता से आगे बढ़ें ऐसा प्रबुद्ध नागरिक चाहता है लेकिन आये दिन डिजिटल चैनल के मेले और बाकी साहित्य महोत्सव जो एक माह में अनेक जगह होने लगे, पुस्तक मेले की सार्थकता कम करते है.
आइये जानते है साहित्य/पुस्तक मेले के आयोजनों के बारे में.
जनवरी माह में होने वाले साहित्य /पुस्तक मेले :- जयपुर, कोलकाता, कालीकट, रायपुर, हैदराबाद, दिल्ली, भोपाल
फ़रवरी माह में होने वाले साहित्य /पुस्तक मेले :- चेन्नई, मुंबई, कलिंगा, नागालैंड,काशी
अप्रैल माह में होने वाले साहित्य/पुस्तक मेले :- नैनीताल
सितम्बर में होने वाले साहित्य/ पुस्तक मेले :- उड़ीसा
अक्टूबर में होने वाले साहित्य/ पुस्तक मेले :- अल्मोड़ा,कुरुछेत्र,
नवम्बर में होने वाले साहित्य / पुस्तक मेले :- मुंबई, चंडीगढ़, नागपुर, लखनउ
दिसंबर में होने वाले साहित्य/पुस्तक मेले :- पुणे, गोवा, बंगलुरु
तय करें कौन किधर जायेगा ! क्या ये विद्वानों का विभाजन नहीं है ? या तो आप माँ सरस्वती के पुत्र हो सकते है या फिर लक्ष्मी के और यदि लक्ष्मीपुत्र हैं तो ही जनवरी के सारे आयोजनों में जा सकते है या फिर किसी सहायता के जो एजेंडे के लिए जरुरी होते है या फिर उस स्थान पर आप हों जो आपको खर्च न करने दें और सामर्थ्य दें कि आप सभी जगह जाने की हिम्मत रखें। सवाल ये है कि किताबें या साहित्य बाँधा जा सकता है ? ये प्रश्न विचारणीय है लेकिन इसका कोई उत्तर नहीं है, आखिर एजेंडे और हितोँ के समीकरण में पांचो उँगलियाँ बराबर नहीं होती।
रायपुर में भी साहित्य महोत्सव है दो सप्ताह के बाद,पहला महोत्सव भेंट चढ़ गया था वामपंथी एजेंडे में लेकिन इस बार ये समर्थ और सशक्त हाथों में है. शुभकामनाओं सहित – गिरीश मिश्र






