नरेटिव का बुना जाना आज के दौर का वो हथियार है जो पहले किवदंतियों में सुनने और सुनाने मिलता था. पहले के ज़माने के नरेटिव का साक्ष्य न होने के कारण वैसे ही मान लिया गया जैसे उसके ताने बाने बुनते समय सोचा गया था और उसका परिणाम आती हुई पीढ़ियां भुगतते रहीं. हिन्दू धर्म सहिष्णु रहा हिंसक नहीं, लेकिन हिन्दू धर्म छोड़ने के बाद जो दूसरे अन्य धर्मों में गए हिन्दुओं से ज्यादा हिंसक हो गए ! क्यों ? सोचते तो होंगे कहीं न कहीं ? जी वही सोच जो इधर और उधर में है किताब से निकलकर उनके मुंह में आती है जो ये जानते है कैसे जनमानस के दिमाग को एक नकारात्मक सोच की तरफ धकेला जाए..
बंगलादेश और पाकिस्तान हमारे सामने उदाहरण है और साथ ही देश के अंदर भी धर्म परिवर्तन किये हुए लोग, देश को जन गण मन देने वाला बंगाल और उसकी वर्तमान सरकार का मंत्री मदन मित्र माथे पर तिलक लगाए, भगवा अंग वस्त्र लिए अब प्रभु राम को मुस्लिम बताने तुला हुआ है और हमारे धर्माचार्य कोई फतवा जारी नहीं कर रहे यही हिन्दू धर्म की महानता है. हिन्दू होकर हिन्दू धर्म का नुकसान ऐसे ही आतताइयों ने किया है. ये बयान शर्मनाक है. बंगलादेश में जो हो रहा वह घृणित है और यूनुस सरकार ने बंगलादेश को एक अराजक देश में बदल डाला है नरेटिव बना बना कर.
देश के अंदर भी एक बुजुर्ग युवा नेता है जो सोरोस जैसे देश द्रोहियों के एजेंटो से विदेश में मिलकर भारत वापस आकर अराजकता पैदा करने की कोशिश करते रहता है. एप्सटीन फाइल्स का नरेटिव बनाकर हिन्दुस्तान में बहुत सी बिल्लियां छींका टूटने का इंतज़ार कर रही थी, देखना होगा अब सरकार कब ऐसी बिल्लियों को ठीक करता है जो झूठ का पुलिंदा बांध कर परोसने तैयार रहती है.,
नरेटिव से बचें और कोई बनाते दिखे तो उसे वहीँ ठोकें और देश के संविधान का पालन करते हुए सही उपाय करें.






