सत्ता जब गलत हाथों में चली जाए तो वह अराजक तत्वों की पोषक बन जाती है. कहते है न जूतों को पैर में ही पहना जाता है, सर पर नहीं बैठाया जाता और जो कौम अब मारा तो मारा फिर मार के देख वाली होती है उसे तो खासकर इतनी बारीक नजरों से देखना चाहिए कि कल नासूर न बने. हमारा पैदा किया हुआ देश, हमें ही आँखे दिखाए, हमारे मछुआरों को पकड़ कर प्रताड़ित करे, नावों में टक्कर मारे और हिमाकत देखिये भारतीय उच्चायोग में हमला करने की कोशिश करे और हम इतने भीरु की शांत बैठें !
हमारे देश में बंगलादेशी घुसपैठियों को जो पाल रहे हैं उन्हें भी अब नापने की आवश्यकता है.
जब से शेख हसीना को बंगलादेश से निर्वासित किया तब से अमेरिकन पिठ्ठू मोहम्मद यूनुस भारत के खिलाफ अपना जहर उगलते जनता को लगातार भड़का रहा है, यूनुस नहीं चाहता कि बंगलादेश में फरवरी में चुनाव हो इसलिए वो भारत को उकसाकर युद्ध जैसी स्थिति पैदा करके आपातकाल लगाने की कोशिश में है. इधर खालिदा जिया की पार्टी भी यूनुस को कोई घांस नहीं डाल रही ये अमेरिकन दलाल बहुत चिंताग्रस्त है.
बंगलादेश में हिन्दुओ की हालत किसी से छुपी नहीं है लेकिन अमेरिकन दबाव में यूनाइटेड नेशन कुछ नहीं कह रहा, चीन भी बंगलादेश में एक कोना पकड़ा हुआ है और बंगलादेश एक व्यक्ति के स्वार्थ के चलते आज द्रौपदी बना हुआ है.
भारत को इस पर गंभीर मनन करना चाहिए लेकिन चुनात तक थोड़ा आहिस्ता चलना चाहिए. चुनाव के बाद भारत अपनी कार्यवाही जरूर करे चाहे जो भी फैसला हो. पिद्दी से देश का आदमी यदि भारत की सम्प्रभुता को चुनौती दे रहा तो उसको उसकी औकात जरूर दिखानी चाहिए।






