ग़जवए हिन्द का सपना लिए कुछ लोग संयोजित तरीके से हिंदुस्तान में अवैध तरीके से जनसख्या विस्फोट करते हुए देश के उन छेत्रों में पैठ बना रहे जहाँ के युवक या तो विदेश भाग रहे या शहर की तरफ रोजगार लेने आ गए. मुफ्त का काम होता है कबाड़, आप स्वयं देखिये आपके गली मोहल्ले कितने कबाड़ी चक्कर लगा रहे ? ये सब के सब तो नहीं लेकिन अधिकांश संदेह के श्रेणी में आते है.
कल प्रियंका गांधी ने सदन में अपनी तगड़ी बहस के दौरान तथ्यात्मक बहस में भाग लेने की कोशिश की और यदा कदा अपनी विषय वस्तु से भटकी, खैर उनकी बहस को अच्छा माना गया इसमें कोई शक नहीं है.
वापस आते है है गजवा ए हिन्द के सपने पर, देश के कोने कोने में फैले रोहिंग्या और बंगलादेशी नागरिकों ने अपने अपने षड्यंत्रों को अंजाम देते हुए कुछ स्थानीय लोगों के साथ सम्बन्ध बनाकर न सिर्फ पहचान पत्र हासिल किये बल्कि उनके परिवार की लड़कियों से शादियां करके अपने वैध होने के रस्ते साफ़ किये. आश्चर्य की बात तो ये है कि tMc जैसी पार्टी के लोगों ने ससुर का नाम पिता जैसे लिखवाने को वैध साबित करने की कोशिश की और संसद तक में ये बात उठाई.
वन्देमातरम का विरोध करते हुए सारे मुस्लिम सांसद और उनके नाम कल गृहमंत्री अमित शाह ने राज्य सभा के पटल पर रखा. देश को जहाँ बहुसंख्यक मातृभूमि मानते है लेकिन ये एक तबका है इसे स्वीकार नहीं करता।
देश में अब या कभी नहीं का समय है, तय करिये अपने इन नेताओं को सीमित करें संसद और राज्य सभा से या फिर तैयार रहें एक और विभाजन के लिए.






