देश की जनता ने उदासीनता और खड़े न हो पाने की लाचारी के कारण न सिर्फ देश हित के महत्वपूर्ण अवसर छोड़े वरन देश की सुरक्षा में भी जाने अनजाने शामिल होते गए. सोने की चिड़िया और आध्यात्म का केंद्र रहने वाले भारत वर्ष में अवसरवादी कब करवट बदलकर बाबर, हुमायु, अकबर का देश कहलाने वाली चेष्टा का पूर्वाग्रह स्थापित करते गए आभास ही नहीं हुआ !
देश के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को भुला दिया गया और विल्स के पैकेट में बीड़ी जैसी कहावत चरितार्थ करते हुए महात्मा गाँधी का सरनेम लेकर नकली गांधियों ने देश का बंठाधार कर डाला।
नेताजी, भगत सिंह, आजाद किसी बगीचे के नाम से जाने जाने लगे. देश में अब जो हो रहा हर प्रत्युत्तर है आजादी के उपरान्त होने वाले धोखे और हिन्दू धर्म को नुक्सान पहुंचने वाले मंतव्य का. देश का युवा आज जहाँ अपनी जड़ों में पहुँच रहा है वहीँ देश के सत्ताधारी वर्तमान नेता देश की खोई हुई विरासत को पुनर्स्थापित करने के लिए लगे हुए है.
देश को अगले पांच वर्ष कड़ाई से रहने की आवश्यकता है. इस मिशन को आधा अधूरा नहीं छोड़ा जा सकता. चुनाव आयोग की एस आई आर मुहिंम सफल हो इसलिए प्रशासन को चुस्त दुरुस्त रहना होगा।
भारतीय जनता पार्टी की सरकार जहाँ जहाँ है वहां से खबरे आ रही की BLO को कही कही पर मारा गया है और भगाया जा रहा है. यह उसी उदासीनता का परिणाम है जो हमें लगातार गुलाम बनाते गई.
पुलिस और प्रशासन यदि सर्तक, चुस्त और दुरुस्त रहे तो उनका ये योगदान देश कभी नहीं भूलेगा. – गिरीश मिश्र






