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नाना पाटेकर की मौत में क्या कोई झोल है? गोवा पुलिस ने क्यों दर्ज किया ‘अननैचुरल डेथ’ केस

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एक तरफ दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन से फिल्म इंडस्ट्री में शोक है. देर रात उन्हें पुणे के पास डोंजे गांव स्थित उनके फार्महाउस ‘नानाची वाड़ी’ के पास उनका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ. नाना के बेटे मल्हार ने भारी मन से अंतिम संस्कार की विधिवत तरीके से सारी प्रक्रिया पूरी की. उन्होंने नाना के पैर छूकर उन्हें अंतिम विदाई दी. सोशल मीडिया पर इस अंतिम यात्रा के भावुक वीडियो जहां लोगों का कलेजा चीर रहे हैं. वहीं, दूसरी तरफ उनकी मौत से जुड़ी एक खबर ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. गोवा पुलिस ने इस मामले में ऐसा कदम उठाया है, जिसके बाद उनकी मौत की परिस्थितियों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है. आखिर पुलिस ने किस आधार पर मामला दर्ज किया और इसके पीछे क्या वजह है? क्या यह महज कानूनी प्रक्रिया है या जांच में कुछ ऐसा है, जिसे समझना जरूरी है?
दिग्गज एक्टर नाना पाटेकर के निधन के बाद अब उनकी मौत से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया चर्चा में है. गोवा पुलिस ने अभिनेता की मौत के मामले में ‘अननैचुरल डेथ’ यानी अप्राकृतिक मौत का केस दर्ज किया है. पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, नाना को गोवा के डोना पाउला स्थित उनके घर से अस्पताल लाया गया था, जहां उन्हें मृत अवस्था में पाया गया. फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है. हालांकि, अप्राकृतिक मृत्यु का केस दर्ज होने का मतलब यह नहीं है कि उनकी मौत में किसी साजिश की पुष्टि हो गई है.

BNSS की धारा 194 के तहत दर्ज हुआ केस

‘ 9 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, पणजी पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 194 के तहत मामला दर्ज किया है. इस मामले की जांच पुलिस सब-इंस्पेक्टर नितिन नाइक कर रहे हैं. पुलिस रिकॉर्ड में बताया गया है कि नाना पाटेकर को डोना पाउला स्थित ओशन पार्क आवास से बाम्बोलिम के मणिपाल अस्पताल के कैजुअल्टी वार्ड में मृत अवस्था में लाया गया था. पुलिस अब उनकी मौत की परिस्थितियों और कारणों की जांच कर रही है.
नाना पाटेकर का 8 अक्टूबर की सुबह निधन हुआ था. रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्हें गोवा स्थित अपने घर पर सीने में तेज दर्द हुआ था. इसके बाद मेडिकल टीम को बुलाया गया. अभिनेता घर पर बेहोश मिले और उन्हें बचाने के लिए सीपीआर दिया गया. बाद में उन्हें मणिपाल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने भी करीब 45 मिनट तक उन्हें बचाने की कोशिश की. मणिपाल अस्पताल के ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. शेखर सालकर ने बताया था कि तमाम कोशिशों के बावजूद एक्टर को बचाया नहीं जा सका. उन्हें सुबह करीब 5:20 बजे मृत घोषित किया गया. डॉक्टरों ने शुरुआती तौर पर कार्डियक अरेस्ट की बात कही थी, जबकि मौत की परिस्थितियों की पुष्टि के लिए पोस्टमार्टम की प्रक्रिया अपनाई गई.

पुलिस करेगी परिवार के सदस्यों से पूछताछ

रिपोर्ट्स की मानें तो पुलिस जांच के तहत परिवार के सदस्यों और अन्य संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए जा सकते हैं. पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी मौत के कारणों को समझने में अहम भूमिका निभाएगी. पुलिस की जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि दिग्गज एक्टर नाना पाटेकर की मौत किन परिस्थितियों में हुई. आपको बता दें कि ‘अननैचुरल डेथ’ केस दर्ज करना एक कानूनी प्रक्रिया है, जिसका इस्तेमाल अचानक या परिस्थितियों की जांच जरूरी होने वाली मौतों में किया जा सकता है.