आरोप प्रत्यारोप जीवन का अंग है और सहजता में इसे लेना चाहिए, लेकिन जब जीवन स्वयं से ऊपर सर्वहारा से सम्बंधित हो, वृहद समाज से सम्बंधित हो तब हर व्यक्ति को अपने ऊपर समाज को रखना चाहिए और उस चरित्र को जीना चाहिए जिसकी सीढियाँ चढ़कर वो उस जगह वहां पहुँच चुका है जहाँ से वह भस्मासुर से ज्यादा कुछ दिखाई नहीं देता।
UGC वो ब्रह्मास्त्र था जिसे मोदी जी जैसे प्रभावशाली का व्यक्तित्व प्रभावित हुआ और पहली बार देशभक्त लोगों के बीच उनके प्रति अनास्था देखी गई, दिग्विजय सिंग जी ने कहा कि UGC ड्राफ्ट में सामान्य वर्ग को शिकायत करने का प्रावधान रखा था ! फिर किसने गायब किया ? क्या इसमें ऊपर से समर्थन था ? या ज्यादा होशियारी में की गई वो हरकत जिसके परिणामो की कल्पना नहीं की थी भाजप ने ? और यदि मान लें आपका कोई रोल नहीं था तो फिर इतनी हिम्मत किसकी हुई कि उसने आपको ही निपटाने की नींव रख दी ?
अब आप कितना भी गंगा नहा के आ जाइये आप संदेह से परे नहीं है. चलिए बात करते है संघ के प्रयासों की, आज सुबह मुझे निमंत्रण मिला कल एक कार्यक्रम का जिसमे विराट हिन्दू सम्मेलन आयोजन की बात की गई है. बहुत अच्छा प्रयास है और बिलकुल ये ही संघ बरसों से करता आया है, लेकिन इनके कुछ मंत्री चाहे वो छत्तीसगढ़ में हों या केंद्र में हमेशा अपने व्यक्तिगत स्वार्थों के चलते न सिर्फ चर्चा में रहते है बल्कि अपनी हरकतों से संघ के पूरे किये धराये पर पानी फेर देते है.
ऐसा प्रतीत होता है कि इन मंत्रियों को ऐसा लगता है समय कम है जितना पैसा कमा सकते हो कमाओ, क्योकि सरकार दुबारा नहीं आएगी या आएगी भी तो इनको अपनी सात पीढ़ियों को तारने पैसे नहीं मिलेगा।
बेशर्मों की तरह राष्ट्रगान चलते समय उसे उपेक्षा में डालकर स्टाल्स पर जुगाड़ ढूंढ़ते छत्तीसगढ़ के एक मंत्री जिन्हे कला प्रेम का बहुत ज्ञान भी है की चर्चा बहुत जोर शोर से सुनाई देती है और ऐसा नहीं है कि इसकी गूंज सुनाई नहीं देती, लेकिन ग़ालिब कुछ तो मजबूरियां होंगी।
बहरहाल संघ के इस प्रयास की मैं सराहना करता हूँ और आमंत्रण देता हूँ हर हिन्दू समज के अंगों को कि आएं और इसका हिस्सा बने. UGC को एक बुरा सपना मानकर आगे बढ़ना होगा और किसी न किसी आगे बढ़कर उन मंत्रियों को रोकना होगा जो आज निंदा का कारण बन रहे.सवर्ण समाज पर होने वाले सोशल मीडिया पर हमलों पर FIR होनी चाहिए।






