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अपनी बात – अविमुक्तेश्वरानंद या अवीनुक्तेश्वरानन्द?

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शंकराचार्य की पदवी को ईश्वर के समकक्ष रखा गया हैं, आदि शंकराचार्य पैदल चले, उन्होंने कठिन वातावरण का सामना किया और सनातन की स्थापना के लिए पीठों की स्थापना की. चार पीठ और चारों पीठ के शंकराचार्यों ने धर्म को आगे बढ़ाने में अभूतपूर्व योगदान दिया चाहे वो राम मंदिर आंदोलन हो या रथ यात्रा हो और उन्होंने आशीर्वाद दिया।
हाल के मौनी अमावस्या स्नान के के दौरान एक शंकराचार्य जो हमेशा विवादों में रहते है ने पुनः यहाँ पर अपना नाटक किया और अव्यवस्था फ़ैलाने की कोशिश की. इनके विरुद्ध बाकी शंकराचार्यों ने भी सवाल उठाये थे, जी बात हो रही अविमुक्तेश्वरानंद की जी की, कभी ३७० पर अनर्गल टिप्पणी, कभी अतीक जैसे गुंडे के प्रति प्रेम, इनके कारनामे बहुत लम्बे है, दुर्भाग्य हमारा ये है कि जिस समाज से हम आते है ये भी उसका हिस्सा है लेकिन हम क्या करें ? धर्मस्थापना में जो जरुरी है प्राथमिकता उसी को देना होता है. ब्राह्मणों या सवर्णो का जितना नुकसान इस सरकार ने किया है उतना किसी ने नहीं किया लेकिन उसके बाद भी दधीच जैसे अपने से ऊपर धर्म रक्षा और सनातन रक्षा के लिए वे चुप रहे और उस सरकार का साथ दिया जो सनातन के लिए कुछ कर रहे है.
अविमुक्तेश्वरानंद इतने नुख्स निकाल रहे है जैसे इस देश में सनातन स्थापना करने की कोशिश बुलडोजर के नीच दबाने जैसी हो गई. उधर केशव मौर्य अविमुक्तेश्वरानंद को प्रणाम भेज रहे, UGC का अलग से विवाद पैदा किया गया, कुल मिलाकर योगी जी के सामने चुनौतियां खड़ी करने की कोशिश की जा रही है. लेकिन योगी जी के साथ सवर्ण खड़ा रहेगा ये मोदी जी जानते है. मोदी जी को नीचे क्या चल रहा पता है या नहीं इसकी जानकारी नहीं लेकिन यदि योगी जी के खिलाफ चल रहे किसी भी अंतरघात को कोई अपने उस हित के चलते साध रहा जो अनर्थक है तो याद रखें साफ़ हो जायेंगे।
बीजेपी के दो फाड़ जल्दी होंगे यदि इनका माथा सही नहीं हुआ तो. मोदी जी को और पूज्य मोहन भागवत जी को इसका संज्ञान लेना होगा। अविमुक्तेश्वरानंद और उनके छिपे सहयोगियों को UGC जैसा हथियार मिलेगा, उत्तरप्रदेश, बंगाल सबमे आपको तकलीफ होगी।मोहन यादव जैसे मुख्यमंत्री को भी आत्मबोध होना चाहिए क्या कर रहे.

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