मतदाता सूची की जांच की स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के खिलाफ दायर याचिकाओं की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह कोई वार्षिक प्रक्रिया नहीं है और अदालत को इसमें हस्तक्षेप करते समय सतर्क रहना चाहिए.नई दिल्ली:
निर्वाचन आयोग भारत के कई राज्यों में मतदाता सूची की गहन जांच करवा रहा है. स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) की इस प्रक्रिया पर कई विपक्षी दल सवाल उठा रहे हैं. इस प्रक्रिया के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में भी कई याचिकाएं दाखिल की गई हैं. विपक्षी दलों का दावा है कि इस प्रक्रिया के जरिए दूसरे दलों के समर्थकों का नाम काटा जा रहा है. लेकिन इसे प्रमाणिक तौर पर साबित नहीं किया गया है. इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया है कि सर्वोच्च अदालत SIR में ज्यादा दखल नहीं देगा. बुधवार को SIR के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने कहा- यह हर साल होने वाली कोई प्रक्रिया नहीं है. चुनाव आयोग इसे 20 साल बाद कर रहा है. ऐसे में इसे माइक्रो मैनेज नहीं कर सकते.
मतदाता सूची की जांच की स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के खिलाफ दायर याचिकाओं की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह कोई वार्षिक प्रक्रिया नहीं है और अदालत को इसमें हस्तक्षेप करते समय सतर्क रहना चाहिए.
सीजेआई और जस्टिस बागची की पीठ ने क्या कहा?
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि चुनाव आयोग लगभग 20 साल बाद यह अभ्यास कर रहा है, इसलिए कोर्ट इस प्रक्रिया को “माइक्रो-मैनेज” नहीं कर सकती. पीठ उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिनमें नौ राज्यों और तीन केंद्रशासित प्रदेशों में चुनाव आयोग द्वारा शुरू किए गए SIR अभियान को चुनौती दी गई है.





