जब से वैज्ञानिकों ने उल्कापिंडों (Meteorites) का माइक्रोस्कोप से अध्ययन शुरू किया है वे हैरान होने के साथ उत्साहित भी हुए हैं. अधिकांश उल्कापिंड कांच के छोटे दाने (Beads of Glass) से बने हैं जो उस समय बने थे जब हमारे सौरमंडल का निर्माण (Formation of Solar System) हो रहा था. उस समय ग्रहों का निर्माण भी शुरू नहीं हुआ था. अब शोधकर्ताओं ने एक विस्तृत विश्लेषण किया है कि उल्कापिंडों में इन कांच के दानों या टुकड़ों का अस्तित्व कैसे आया और साथ ही इनसे हमारे सौरमंडल के उस शुरुआती दौर की क्या जानकारी मिल सकती है.
शुरुआती धूल की पड़ताल
शिकागो यूनिवर्सिटी के इस अध्ययन के प्रमुख लेखक निकोल जाइक नाय ने बताया कि ये बड़े सवाल हैं उल्कापिंड सौरमंडल की शुरुआती धूल के हालात का खुलासा कर सकते हैं. जिसका हमारी पृथ्वी और दूसरे ग्रहों के विकास पर प्रभाव पड़ा था. यह सवाल 50 साल पहले सामने आया था.
कांच के दाने
उल्कापिंडों में कांच के दानों को कॉन्डरूल कहते हैं. वैज्ञानिकों का लगता है कि वे उन अवशेषों से बनी चट्टानों के टुकड़े होंगे जो अरबों साल ले अंतरिक्ष में तैर रहे थे और जो बाद में जमा होकर वे ग्रह बन गए जिन्हें हम जानते हैं. इस तरह से देखा जाए तो कॉन्डरूल वैज्ञानिकों के लिए बहुत महत्वपूर्ण हो जाते हैं.
बदल गए हैं तब से अब तक तत्व
इन कॉन्डरूल से उन्हें सौरमंडल के शुरुआती तत्वों की जानकारी मिल सकती है जो पृथ्वी पर टेक्टोनिकल प्लेट्स और ज्वालामुखियों के बनने से काफी पहले ही बने हैं. इन घटनाओं के बाद पृथ्वी के तत्वों में भी बहुत सारे बदलाव देखने को मिले हैं. लेकिन कॉन्डरूल कैसे बने यह अभी तक स्पष्ट नहीं था.






